दीप जले मन खिल उठे
भजन का नाम:
“दीप जले, मन खिल उठे”
भजन:
दीप जले घर-घर, खुशियाँ आयें संग-संग।
माँ दुर्गा की कृपा से, हर दुख दूर हो अंग-अंग।
सुर में गाओ:
शक्ति माँ, ओ माँ दुर्गा,
हम पर अपनी छाया रखो।
खुशियों की बहार लाओ,
हर दिन दीपक सा चमकाओ।
रंग-बिरंगे फूल खिले, मिठास घर-घर फैले।
संग-संग गाएँ हम भजन, खुशियाँ दिल में बसेले।
शांति, प्रेम, और आनंद से,
घर-आँगन महके सदा।
माँ के चरणों में शीश नवाएँ,
दीपावली‑नवरात्रि में हम गाएँ यह गान सदा।
क्लाइमेक्स/अंतिम लाइन:
जय माँ दुर्गा, जय माँ लक्ष्मी,
खुशियों की ये बौछार सदा बनी रहे।
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💡 टिप्स इसे और प्रभावशाली बनाने के लिए:
1. रिदम: तेज और उत्सवमय — घर में गूँजने वाला।
2. संगीत: ढोलक, मृदंग या हल्के हारमोनियम के साथ।
3. उच्चारण: हर लाइन को स्पष्ट और जोर से गाओ, ताकि उत्सव का आनंद महसूस हो।
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