सांसों की माला पे सिमरू मैं पिया
🌺 साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पिया 🌺
🔆 भजन के बोल (Lyrics)
साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पिया,
नाम सिमरूँ मैं पिया।
साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पिया॥
मेरे साजन हैं उस पार,
मैं मनवा हूँ इस पार।
साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पिया॥
तुम बिन मोरे नैनन में,
कोई सपना न समाये।
तेरी यादों के दीपक से,
मन मंदिर जगमगाये॥
साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पिया,
नाम सिमरूँ मैं पिया॥
तेरे चरणों में मेरी दुनिया,
तेरे बिना सब सूना।
मेरे हर जन्म की पूँजी तू,
मेरा तू ही होना॥
साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पिया,
नाम सिमरूँ मैं पिया॥
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🌼 भजन का अर्थ (भावार्थ)
“साँसों की माला पे सिमरूँ मैं पिया” → हर श्वास के साथ मैं अपने प्रिय प्रभु (कृष्ण) का नाम जपती हूँ।
“मेरे साजन हैं उस पार, मैं मनवा हूँ इस पार” → प्रभु उस पार (आध्यात्मिक लोक में) विराजमान हैं और मेरा मन इस संसार में है, परंतु स्मरण से दूरी मिट जाती है।
“तुम बिन मोरे नैनन में, कोई सपना न समाये” → आपके बिना मेरी आँखों में कोई और सपना जगह नहीं पा सकता।
“तेरी यादों के दीपक से, मन मंदिर जगमगाये” → आपकी याद ही मेरे हृदय-मंदिर को रोशन करती है।
“तेरे चरणों में मेरी दुनिया, तेरे बिना सब सूना” → मेरे लिए संपूर्ण संसार आपके चरणों में ही है, आपके बिना सब खाली है।
“मेरे हर जन्म की पूँजी तू, मेरा तू ही होना” → मेरे हर जन्म की सबसे बड़ी कमाई, सबसे बड़ा धन आप ही हो प्रभु।
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🌟 महत्व
यह भजन प्रेम और भक्ति का संगम है।
इसमें भक्त मीरा जैसी विरहिणी की तरह कृष्ण को अपना प्रियतम मानकर उनकी याद में लीन हो जाती है।
इसे गाने से मन में अनुराग, समर्पण और आध्यात्मिक प्रेम का अनुभव होता है।
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