कर्म का महत्व – सरल भजन हिंदी में”

 भजन: कर्म का फल


अंतरा 1:

कर्म करो भली भांति, फल की चिंता न करो,

धरती पे चलो सच्चाई से, अंधकार को दूर करो।


मुकड़ा:

कर्म ही पूजा है, कर्म ही भक्ति है,

जो बोओगे वही काटोगे, यही सच्ची नीति है।


अंतरा 2:

सपनों की राह मत देखो, मेहनत को अपनाओ,

जो आज बोओ कर्मों में, वही कल तुम पाओ।


मुकड़ा दोहराएँ:

कर्म ही पूजा है, कर्म ही भक्ति है,

जो बोओगे वही काटोगे, यही सच्ची नीति है।


अंतरा 3:

मन को पवित्र रखो, बोलो सदा सच्चाई,

कर्मों का दीप जलाओ, दूर करो सारी ठकाई

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